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Wednesday, November 14, 2018

Lift me mirror kyo lga hota hai - लिफ्ट में शीशा यानी की मिरर क्यों लगा होता है

हेलो फ्रेंड्स, आज का टॉपिक थोड़ा सा अमेजिंग और हटकर है क्योकि आज मैं आपको ऐसे इंटरस्टिंग फैक्ट के बारे में बताने जा रही हूँ जिसके बारे में आपने सोचा तो बहुत बार होगा लेकिन आपको अपने सवाल का जवाब नहीं मिल पाया होगा। क्योकि ये सवाल है ही ऐसा, जिसका जवाब बहुत कम लोगो को पता होगा। तो चलिए जान भी लेते है की ये सवाल है क्या। फ्रेंड्स सवाल है की लिफ्ट में शीशा यानी की मिरर क्यों लगा होता है (Lift me mirror kyo lga hota hai ) ? है ना चौंका  देने वाला सवाल।  चलिए जान लेते है इस सवाल का जवाब की लिफ्ट आखिर शीशा क्यों लगा होता है। (Lift me mirror kyo lga hota hai ).

पल भर में जो लिफ्ट ग्राउंड फ्लोर से टॉप फ्लोर तक पहुंचा देती हो,उसमें भला आईने का क्या काम?दरअसल, इसके पीछे बहुत बड़ी वजह है। इंजीनियर्स और एलिवेटर बनाने वाली कंपनियों ने बहुत सोच-समझकर ऐसा डिजाइन तैयार किया है।

Lift me mirror kyo lga hota hai


दरअसल, जिस दौर में औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई, उसी दौरान ऊंची इमारतों का निर्माण शुरू हुआ। जैसे-जैसे बिल्डिंग लंबी होती गई, लिफ्ट की जरूरत महसूस होने लगी। मगर जब लिफ्ट में लोग सवार होकर टॉप फ्लोर तक जाने लगे तो उन्हें एहसास हुआ कि उनका काफी वक्त बर्बाद हो रहा है।

लोगों का कहना था कि लिफ्ट बहुत धीरे काम करता है जिसकी वजह से उनका वक्त बर्बाद हो जाता है। वहीं, कई लोगों ने कहा कि उन्हें हर वक्त यह डर सताता है कि कहीं लिफ्ट टूट ना जाए, कहीं वह एलिवेटर की वजह से किसी हादसे का शिकार ना हो जाएं।

Lift me mirror kyo lga hota hai
Image Source : Third party url.


कंस्ट्रक्शन कंपनी और लिफ्ट बनाने वाले विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हो गए कि आखिर लोगों की समस्या हल कैसे की जाए, कैसे लिफ्ट की स्पीड बढ़ाई जाए और उनके मन से खौफ दूर किया जाए। तभी एक ज्ञानी शख्स ने बताया कि लिफ्ट स्लो नहीं है, बस लोग ऐसा सोचते हैं कि लिफ्ट की स्पीड कम है। फिर उस महापुरुष ने एक शानदार आइडिया दिया।

उस एक्सपर्ट ने बताया कि अगर लिफ्ट में आईना लगा देंगे, तो लोग खुद को निहारने में मशगूल हो जाएंगे, उनका ध्यान भटकेगा तो उन्हें एहसास भी ना होगा कि लिफ्ट की स्पीड क्या है। यह ट्रिक कामयाब हुई। लिफ्ट में आईना लगने के बाद जिन लोगों ने इसका इस्तेमाल किया उन्होंने बताया कि अब लिफ्ट तेजी से ऊपर-नीचे जाती है। हालांकि, असलियत में एलिवेटर की स्पीड में कोई बदलाव नहीं किया गया था।

फ्रेंड्स उम्मीद है आप सभी के मन में मिरर और लिफ्ट को लेकर जो सवाल था, आपको उसका जवाब मिल गया होगा।  इसी तरह के रोचक जानकारी के लिए हमसे जुड़े रहें। किसी भी प्रकार के सवाल अथवा सुझाव के लिए आप हमे कमेंट या फिर ईमेल कर सकते है। पोस्ट को अंत तक पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। 

Tuesday, October 9, 2018

Why the Rolex Watches are soo Costly आखिर क्यों लाखो में होती है रोलेक्स के घड़ियों की कीमत

दुनिया भर में रोलेक्स घड़िया अपनी कीमतों के लिए जानी जाती हैं। इन घड़ियों को हस्तियों के रसूख में इजाफा करने के लिए स्टेटस सिंबल के बतौर पहना जाता है। लेकिन बहुत से लोग ये सोचते हैं कि समय तो एक आम घड़ी भी दिखाती है तो फिर रोलेक्स की घड़ी इतनी महंगी क्यों है..? क्या आप इसका कारण जानते हैं..? अगर आप इसकी असल वजह जान लेंगे तो आपको जरूर हैरानी होगी। 

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Image Source : Third party url reference 

दरअसल, रोलेक्स घड़ियां अपनी खास कारीगरी के लिए जानी जाती हैं। इसे ऐसे अनोखे तरीके से तैयार किया जाता है कि इसकी कीमत लाखों में जा पहुंचती है। तभी तो यह घड़ी इतनी महंगी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ये घड़ी इतनी महंगी क्यों होती हैं? दरअसल, कंपनी का दावा है कि रोलेक्स घड़ियां साधारण नहीं हैं। कंपनी ने इनके प्रोडक्शन के लिए अलग से एक रिचर्स एंड डिवेलपमेंट लैब बनाई है।

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Image Source : Third party url reference 

इस लैब में घड़ियों पर इतनी बारीकी से काम होता है जो दुनिया में शायद ही कहीं ओर होता हो। लैब एक से बढ़कर एक उपकरणों से लैस है, जबकि यहां काम करने वाले पेशेवर कारीगर इसमें काम करते हैं। इस आधार पर रोलेक्स के कारीगर घड़ियों को डिजाइन भी करते हैं। रोलेक्स मैकेनिकल घड़ियां बनाती है। मैकेनिकल घड़ियां यानी जिनमें मशीनरी का भरपूर इस्तेमाल होता है। कंपनी का कहना है कि ऐसी घड़ियां बनाना आसाम काम नहीं है, इसलिए बाजार में इनकी कीमत खुद-ब-खुद बढ़ती जाती है।



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Image Source : Third party url reference 



हली दफा 1953 में रोलेक्स बनाई गई थी। सबसे पहले रोलेक्स की सबमैरिनर घड़ी खास तैराकों और गोताखोरों के लिए बनाई गई है। कंपनी दावा करती है कि रोलेक्स की एक घड़ी में इतने बारीक पार्ट्स जुड़े होते हैं कि इनकी गिनती करने वाला भी इन्हें भूल जाएगा।इन्हें बड़ी सावधानी से लगाना पड़ता है क्योंकि घड़ियां बनाते वक्त उनके खराब होने के आसार बहुत ज्यादा होते हैं। बहुत सी घड़ियों की पॉलिश तो हाथ से की जाती है। ज्यादातर पुर्जों को फिट करने के लिए अंतिम आकार भी हाथों से ही दिया जाता है। रोलेक्स में यूज किया जाने वाला मैटेरियल ही इसकी कीमत को बड़ा देता है।


दरअसल, रोलेक्स में इस्तेमाल किया जाने वाला मैटेरियल काफी महंगा होता है। इनमें 940 एल स्टील का इस्तेमाल होता है, जबकि बाजार में उपलब्ध अन्य घड़ियों में 316 एल स्टील का प्रयोग इस्तेमाल किया जाता है। इसी से आप इसकी मजबूती का अंदाज लगा सकते हैं। इसके इस्तेमाल से घड़ियां मजबूत और चमकदार बनती हैं। घड़ी के डायल में व्हाइट गोल्ड का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा घड़ी में जिन नंबरों का इस्तेमाल किया जाता है वो स्पेशल कांच के प्लेटिनम से तैयार किए जाते हैं। इसमें बेजेल सेरेमिक यानी चीनी मिट्टी का भी इस्तेमाल किया जाता है।


ये घड़ियां कम संख्या में बनाई जाती है। घड़ी में एक खास बात ये भी है कि इसे बनाने में सोने और चांदी का इस्तेमाल भी किया जाता है। घड़ी बनाने में दोनों मैटल को पिघलाकर बनी चीजों का घड़ियों में इस्तेमाल होता है। आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि इन घड़ियों का निर्माण स्विटजरलैंड में किया जाता है। इनकी कीमत ज्यादा होने का एक कारण ये भी माना जाता है कि रोलेक्स घड़ी बनाने वाले यहां के कारीगरों की पगार बहुत ज्यादा होती है। यह कंपनी हर वर्ष 8 से 10 लाख कलाई घड़ियां बनाती है।


दोस्तों उम्मीद करता हूँ आपको पोस्ट अच्छी लगी होगी , पोस्ट पर अपने सुझाव और सवाल के लिए हमे निचे कमेंट बॉक्स में कमेंट जरूर करें। जानकारी अच्छी लगें तो प्लीज शेयर जरूर करें। हमारी वेबसाइट पर Visit करने के लिए आप सभी का धनयवाद।